Tuesday, 27 June 2017

पढ़व लिखव (दोहा)

पढ़व-लिखव (दोहा 13/11)

पढ़व लिखव लइका तुमन,इही तुहँर ले आस।
सब धन दौलत ले बने,सिक्छा हे जी खास।।

कलम काम के जी हवय,करव रोज अभ्यास।
देख ताक लव ककहरा,झटकुन होवव पास।।

गुणा इबारत  अउ  करव , भाग  घटाना  जोड़।
सीख सबोझन लव गणित,आलस पन ला छोड़।।

कूदत नाचत जी पढ़व, रस्ता रेंगत  जात।
खेल खेल मा सीखना,आय मँजा के बात।।

आस पास के लव तुमन,चलत फिरत संज्ञान।
खेत  खार  बारी  सबो , देखव गउ  गउठान।।

पढ़ना लिखना हे बने ,मन मा राखव ठान।
गुनव कढ़व सब झन बनव,देश राज के शान।।

आज्ञाकारी तुम  बनव,रखव  बड़े के मान।
पढ़ना तब होही सफल,सही कहँव मैं जान।।

हेमंत कुमार मानिकपुरी
भाटापारा
छत्तीसगढ़

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