Tuesday, 13 June 2017

उमड़ घुमड़ करिया बादर,
पानी सरबर सरबर कर दे,
झुख्खा हे धरती के कोरा,
हे मेघ दूत तँय दया कर दे।

हे मेघ.....

उसनावत हे जम्मो परानी,
जग चिल्लावय पानी पानी,
अब दे फुहार नव जीवन बर,
झरर झरर बरसा कर दे।

हे मेघ......

जंगल के हरियाली बर,
चुरगुन के किलकारी बर,
बियाकुल चौपाया मन म,
शीतल नीर सरस भर दे।

हे मेघ.....

नँदिया तरिया खोचका डबरा,
गली खोर अमरइया नरवा,
जम्मो देखत हे आस लगाये,
सब ल पानी पानी कर दे।

हे मेघ....

बारी-बखरी ,खेती-किसानी,
सब ल चाही कस के पानी,
आँसू झिन किसान के बोहय,
अइसन तैं खुशहाली भर दे।

हे मेघ दूत तँय दया कर दे..

रचना
हेमंत मानिकपुरी
भाठापारा
छत्तीसगढ़

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