Wednesday, 31 May 2017

घूम लिए तीरथ सभी,मन आया ना चैन।
माँ की गोदी में तनय,कभी बिताओ रैन।।

काँटो पर चलती रही,दे तुमको कालीन।
बूढ़ी अम्मा की सदा,सेवा कर लो लीन।।

बाप बना घोड़ा कभी,जिस पर बैठे आप।
घोड़ा अब बूढ़़ा हुआ,आप बनो जी बाप।।

खून,पसीना कर तुझे,बड़ा किया है पाल।
ज्यादा मत थोड़ा सही,फर्ज चुकाओ लाल।।

तेरा  भी  बेटा  तुझे , छोड़  चलेंगे  मान।
अच्छा बोओगे तभी,सुफल मिले है जान।।

हेमंत कुमार
भाटापारा

Saturday, 27 May 2017


दोहे.....१३/११

दाई के अँगना छुटे,ददा बबा के प्यार।

काट बछर सोला डरे,जा मैना ससुरार।।

टोरे ले टूटय नही,लेख लिखे जे हाथ।

बेटी तँय पहुना रहे,बस अतके हे साथ।।

धर ले मइके के मया,इही तोर पहिचान।

सास ननँद देवर ससुर,सबके करबे मान।।

ददा  नवा  दाई  नवा , नवा  ठउर  हे  तोर।

अपन जान तँय राखबे,सबके मन ला जोर।।

अपन सजन के सँग सरग,अँगना घर संसार।

सपना मा झन सोंचबे, अहित कभू ससुरार।।

दोहे....

हेमंत कुमार

भाटापारा

Wednesday, 3 May 2017

दोहे.....

गरमी बाहर है बहुत,बिगड़ गया है रूप।

घर की खिड़की से सुबह,कहने आई धूप।।

धू-धू कर जलती धरा,मिले नही अब ठाँव।

है इतनी गरमी बढ़ी , सूरज  खोजे  छाँव।। 

 

धरती  फटने है  लगी,बरस रहा है  आग।

सड़कें चट चट जल रहीं,सूख गये सब बाग।।

 
 
इंद्र देव करने लगे,त्राहिमाम का जाप।

नदी ताल सब उड़ गये,बनकर जैसे भाप।।

तेज-तेज लू भी चले,खेत खार खलिहान।

जीव जन्तु सब हो रहे,गरमी से हलकान।।

हेमंत कुमार मानिकपुरी

भाटापारा  छत्तीसगढ़