Sunday, 2 July 2017

गीत

प्यासी नदियाँ प्यासी धरती
पर्वत प्यासा प्यासी घाटी
सब देख रहे हैं आओ रे
हे मेघा तुम नीर बरसाओ रे.. २..
नील गगन से पंख लगाकर
उतरो धरती रिमझिम गा कर
दिल की प्यास बुझाओ रे
हे मेघा तुम नीर बरसाओ रे..2..
खेत तरसते देख रहे हैं
बाग बगीचे सूख गये है
अब बागो मे फूल खिलाओ रे
हे मेघा तुम नीर बरसाओ रे..2..
नैना तरसे तुम बिन बादल
सूख गये हैं माँ का आँचल
तुम लहराओ बलखाओ रे
हे मेघा तुम नीर बरसाओ रे....2

Tuesday, 27 June 2017

पढ़व लिखव (दोहा)

पढ़व-लिखव (दोहा 13/11)

पढ़व लिखव लइका तुमन,इही तुहँर ले आस।
सब धन दौलत ले बने,सिक्छा हे जी खास।।

कलम काम के जी हवय,करव रोज अभ्यास।
सीख स्वर अउ ककहरा ,झटकुन होवव पास।।

गुणा इबारत  सँग करव , भाग  घटाना  जोड़।
सीख सबोझन लव गणित,आलस पन ला छोड़।।

कूदत नाचत जी पढ़व, रस्ता रेंगत  जात।
खेल खेल मा सीखना,आय मँजा के बात।।

आस पास के लव तुमन,चलत फिरत संज्ञान।
खेत  खार  बारी  सबो , देखव गउ  गउठान।।

पढ़ना लिखना हे बने ,मन मा राखव ठान।
गुनव कढ़व सब झन बनव,देश राज के शान।।

आज्ञाकारी तुम  बनव,रखव  बड़े के मान।
पढ़ना तब होही सफल,सही कहँव मैं जान।।

हेमंत कुमार "अगम"
भाटापारा
छत्तीसगढ़

Sunday, 25 June 2017

दोहा

गरज गरज बादर बने,पानी कस के ढार।

खेत खार छलके मुही,छलके तरिया पार।।

रूख-राइ जंगल कहे, दे  हम ला  उपहार।

हरियर हरियर हम दिखन,जिनगी हमर सवाँर।।

नान्हेंकन बीजा गड़े,करत हवय गोहार।।

धरती झटकुन भींज तैं,देखँव मँय संसार।।

मेचका धरती मा दबे,हे पानी के आस।

टरटों टरटों जी हमूँ,गा के करबो रास।।

मानुस तन थर्राय हे,पा के अब्बड़ घाम।

पानी के बिन हे परे,गाड़़ा भर के काम।।

नाँगर चलही खेत भर,पाबो कँस के धान।

जाँगर हमर सुफल करव,हे जलधर भगवान।।

हेमंत कुमार मानिकपुरी

भाटापारा छत्तीसगढ़

Tuesday, 13 June 2017

कविता

उमड़ घुमड़ करिया बादर,
पानी सरबर सरबर कर दे,
झुख्खा हे धरती के कोरा,
हे मेघ दूत तँय दया कर दे।

हे मेघ.....

उसनावत हे जम्मो परानी,
जग चिल्लावय पानी पानी,
अब दे फुहार नव जीवन बर,
झरर झरर बरसा कर दे।

हे मेघ......

जंगल के हरियाली बर,
चुरगुन के किलकारी बर,
बियाकुल चौपाया मन म,
शीतल नीर सरस भर दे।

हे मेघ.....

नँदिया तरिया खोचका डबरा,
गली खोर अमरइया नरवा,
जम्मो देखत हे आस लगाये,
सब ल पानी पानी कर दे।

हे मेघ....

बारी-बखरी ,खेती-किसानी,
सब ल चाही कस के पानी,
आँसू झिन किसान के बोहय,
अइसन तैं खुशहाली भर दे।

हे मेघ दूत तँय दया कर दे..

रचना
हेमंत मानिकपुरी
भाठापारा
छत्तीसगढ़

Wednesday, 31 May 2017

दोहा

घूम लिए तीरथ सभी,मन आया ना चैन।
माँ की गोदी में तनय,कभी बिताओ रैन।।

काँटो पर चलती रही,दे तुमको कालीन।
बूढ़ी अम्मा की सदा,सेवा कर लो लीन।।

बाप बना घोड़ा कभी,जिस पर बैठे आप।
घोड़ा अब बूढ़़ा हुआ,आप बनो जी बाप।।

खून,पसीना कर तुझे,बड़ा किया है पाल।
ज्यादा मत थोड़ा सही,फर्ज चुकाओ लाल।।

तेरा  भी  बेटा  तुझे , छोड़  चलेंगे  मान।
अच्छा बोओगे तभी,सुफल मिले है जान।।

हेमंत कुमार मानिकपुरी

भाटापारा छत्तीसगढ़

Saturday, 27 May 2017

दोहा


दोहे.....१३/११

दाई के अँगना छुटे,ददा बबा के प्यार।

काट बछर सोला डरे,जा मैना ससुरार।।

टोरे ले टूटय नही,लेख लिखे जे हाथ।

बेटी तँय पहुना रहे,बस अतके हे साथ।।

धर ले मइके के मया,इही तोर पहिचान।

सास ननँद देवर ससुर,सबके करबे मान।।

ददा  नवा  दाई  नवा , नवा  ठउर  हे  तोर।

अपन जान तँय राखबे,सबके मन ला जोर।।

अपन सजन के सँग सरग,अँगना घर संसार।

सपना मा झन सोंचबे, अहित कभू ससुरार।।

दोहे....

हेमंत कुमार

भाटापारा

Saturday, 6 May 2017

कविता

ओह !गर्मी का दिन आया रे,
कूलर एसी मन भाया रे,
तर तर तर निकले पसीना,
गन्ने का रस कितना भाया रे ।

फ्रिजर मटके का दिन आया रे,
ठंडी पानी खूब पिलाया रे,
धू धू करके जले पूरा बदन,
तरबूजा खरबूजा मन भाया रे ।

अब तो भाजी बढ़ीया लागे रे,
खट्टा भी कितना मन भाया रे,
अब तो हर बाजारों के ठेले पर,
रसदार आम का मौसम आया रे ।

ककड़ी खीरा भी अब तो आया रे,
मन को खूब तृप्त कराया रे,
देख सम्हल कर चलना भैया,
गर्म हवावों(लू) का दिन आया रे....

           हे मं  त